ज्योतिष में सूर्य ग्रह | शक्ति, व्यक्तित्व और स्वास्थ्य पर प्रभाव

नवग्रह परिचय

प्राय सभी ग्रह मानव जीवन को अपनी सामर्थ्य अनुसार प्रभावित करते हैं लेकिन कोई एक ग्रह सर्वाधिक बली होने के कारण व्यक्ति पर अपना शुभ या अशुभ पूर्ण प्रभाव रखता है अर्थात व्यक्ति के संपूर्ण जीवन का प्रतिनिधित्व करता है चाहे वो शुभ हो या अशुभ। फलो की मात्रा ग्रहो के बलों पर निर्भर करती है।

इस वीडियो में ज्योतिष ग्रंथो से लिया गया ग्रहो का विस्तृत परिचय देने का मै पूर्ण प्रयास करूँगा। जिससे आप जान सके कि ग्रहो का व्यक्तित्व, सामर्थय एवं हमारे जीवन में किस किस क्षेत्र को प्रभावित करता है।

सूर्य ग्रह और उसका परिचय

सौर परिवार का मुख्य ग्रह सूर्य सब ग्रहों का केंद्र है जिसके चारों ओर अनेक ग्रह घूमते हैं सूर्य का प्रसिद्ध नाम अंग्रेजी में SUN, अरबी में शम्स, फ़ारसी में खुर्शेद नाम से जाना जाता है।

सूर्य के पर्यायवाची संस्कृत शब्द – आदित्य, भास्कर, अरुण, भानु, दिवाकर, दिनकर, रवि, सविता, भास्कर, मार्तण्ड आदि नाम है।

सूर्य का पौराणिक परिचय

श्रीमद् भागवत के अनुसार पृथ्वी और स्वर्ग के मध्य में जहां ब्रह्मांड का केंद्र है वही सूर्य स्थित होता  है।

पुराणों के अनुसार सूर्य ने संज्ञा और छाया से विवाह किया। छाया से शनि नामक पुत्र उत्पन्न हुआ जो कि पिता की भांति शक्तिशाली ग्रह है। इसलिए शनि को सूर्य पुत्र या छायासुनु  भी कहते हैं।

सूर्य ग्रह का सामान्य परिचय

सूर्य सदैव मार्गी एवं उदय रहने वाला ग्रह है पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमते रहने के कारण ही यह कहीं अस्त और कहीं उदय होता है  उदय अस्त तो भ्रम मात्र है वास्तव में सूर्य अस्त होता ही नहीं है।

इसलिए एक स्थान पर सूर्यास्त के कारण संध्या होती है तो दूसरे स्थान पर सूर्योदय के कारण सवेरा दिखाई पड़ता है सूर्य को काल पुरुष की आत्मा माना गया है इसके संबंध में कुछ तथ्य निम्नलिखित है

सूर्य का वर्ण लाल, मतान्तर  से ताम्र वर्णन कहा जाता है इसका स्वरूप सुंदर है आकृति गोल है इसका तत्व अग्नि है। स्वभाव में स्थिर है पित्त प्रकृति का है इसका गोत्र कश्यप है इसका वार रविवार है और यह राजा का प्रतिनिधित्व करता है

शरीर में प्रभाव -:  सिर से मुख तक इसका प्रभाव रहता है

सूर्य के उपरत्न-: रेड स्टार, नारंगी, अकीक, गुलाबी ओनेक्स इसके उपरत्न है।

सूर्य की रूचि -: सूर्य की रुचि राजनीति शास्त्र में होती है इसका भाग्य उदय काल 22 वर्ष से 24 वर्ष तक होता है

सूर्य से विचारणीय विषय -:  आत्मा -पिता, स्वभाव, लक्ष्मी, सामर्थ  एवं आरोग्यता का विचार होता है इसकी दिशा पूर्व दिशा है। इसकी अवस्था लगभग 50 वर्ष का प्रौढ़  कहा गया है। पुरुष लिंग है सतोगुणी है इसका स्वाद कड़वा है। इसकी धातु स्वर्ण, मतांतर से तांबा है यह क्षत्रिय  जाति का है और इसकी ग्रीष्म ऋतु है

इसका रत्न माणिक्य है।

यह सभी ग्रहों से अधिक बली होता है यह दिन में बली होता है इसको अशुभ ग्रह की संज्ञा दी गई है लेकिन यह क्रूर होने से पिता के समान क्रूर व्यवहार करता है परन्तु सामान्यतया अशुभ नहीं होता।

सूर्य के दान पदार्थ: – सोना, तांबा, रक्त चंदन और लाल पुष्प हैं इसके देवता अग्नि देवता है

राशि स्वामी: – यह सिंह राशि का स्वामी है

सूर्य से होने वाले रोग: अगर सूर्य कुंडली में कमजोर है तो वित्त विकार, नेत्र रोग, हड्डी रोग, अस्ति दुर्बल्या, हड्डी टूटना एवं कान के रोग होने लगते है।

सूर्य का स्वभाव

सूर्य यदि कुंडली में शुभ स्थिति में है वह सत्यवादी कीर्तिवान, आरोग्यवान , अधिकार संपन्न, दयालु, नेतृत्व प्रिय, आत्मविश्वासी गंभीर एवं प्रतिभा संपन्न होता है।

यदि सूर्य कुंडली में अशुभ स्थिति में होता है तो झूठ कपट से स्वार्थ सिद्धि, अधिकारों का दुरुपयोग करने वाला, अभिमानी अपनी प्रशंसा आप करने वाला किसी की ना सुनने वाला विश्वास घाती एवं शक्की, जिद्दी व अड़ियल बन जाता है।

सूर्य की रुचि: सूर्य की रूचि पदार्थ विज्ञान, सैन्य विज्ञान, राजनीति शास्त्र चिकित्सा विज्ञान, नाटयशास्त्र  व आभूषण विद्या में रुचि रहती है। इसलिए बलवान सूर्य होने पर व्यक्ति राजा सामान, उच्च अधिकारी, धनवान, सैनिक, नाटककार, औषधि निर्माता व विक्रेता बनता  है।

सूर्य का विशेष प्रभाव: – सूर्य कुंडली में सर्वाधिक बली होने पर व्यक्ति के जीवन पर 22 से 24 वर्ष के बीच में विशेष शुभ फल प्रदर्शित करता है यदि इस अवधि में दशा एवं अन्य ग्रह स्थिति भी अनुकूल हो तो सर्वाधिक उन्नत होती है।

सूर्य और स्वास्थ्य: – सूर्य शुभ स्थिति में होता है तो सूर्य प्रभावित व्यक्ति कम बीमार पड़ते हैं किंतु सूर्य जब-जब गोचर में  निर्बल होता है तो शरीर में पित्त विकार, हड्डी टूटना कान के रोग, शरीर में जलन, हृदय रोग, चित्त  में व्याकुलता, अग्नि एवं शस्त्र , लकड़ी से चोट,  ब्रेन हेमरेज बुखार आदि हो सकते हैं।

इसलिए क्रोध, शक्ति से अधिक श्रम,  नशीले पदार्थों का सेवन और असंतुलित भोजन से बचना चाहिए।

रक्त की शुद्धता एवं सहज रक्त प्रवाह पर विशेष ध्यान देना चाहिए नियमित व्यायाम करना चाहिए विटामिन A एवं D युक्त चीज़ खाने का विशेष प्रयास करना चाहिए।

ज्योतिषीय सलाह के लिये संपर्क संपर्क करे ।

Pt. Umesh Sharma (Jyotish Acharya)

WhatsApp: +91-9910185535

https://umeshastro.com