चंद्र ग्रह और उसका परिचय

चंद्र ग्रह और उसका परिचय

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य के बाद चंद्रमा को ही महत्व दिया जाता  है क्योंकि पृथ्वी पर से सूर्य के बाद सबसे बड़ा दिखने वाला ग्रह है। चंद्र को अंग्रेजी में MOON अरबी में कमर, फारसी में मेहताब कहते हैं।

चंद्र के पर्यायवाची संस्कृत शब्द इन्दु , सोम, शशि, शशांक, शितरश्मि आदि है।

एक पौराणिक कथा अनुसार पितामह ब्रह्मा द्वारा उत्पन्न किए गए आदि पुरुष मनु की तीन कन्या थी। इनमे से देवहूति नामक दूसरी कन्या का विवाह ब्रह्मा पुत्र महर्षि कर्दम के साथ हुआ था। इन दोनों के संयोग से 9 कन्याओ का जन्म हुआ जिसमे अनुसूया नामक कन्या का विवाह महर्षि अत्रि के साथ हुआ, कालांतर में अनुसूया से तीन पुत्रो का जान हुआ दत्तत्रेय, दुर्वासा एवं अत्रि, अत्रि का पुत्र होने के कारण चन्द्रमा को आत्रेय भी कहा जाता है।

चंद्र ग्रह का सामान्य परिचय

चंद्रमा को काल पुरुष का मन कहा जाता है।  चन्द्रमा को  राज्य अधिकार में रानी की उपाधि मिला हुआ है। चन्द्रमा का शरीर में प्रभाव गले से हृदय तक होता है।  चन्द्रमा शुभ प्रभाव में होने और पक्ष बली होने पर शुभ माना जाता है और अशुभ प्रभाव में व कृष्ण पक्ष में अशुभ माना जाता है।

यह स्त्री ग्रह है और युवा अवस्था का प्रतीक है , इसका विशेष प्रभाव 24 से 25 वर्ष के बीच में होता है।

चंद्रमा एक सात्विक ग्रह है नमकीन स्वाद का प्रतिनिधित्व करता  है इसकी धातु चांदी है इसका वार सोमवार है और वर्षा ऋतु को प्रदर्शित करता है कद में लंबा है इसका रत्न मोती है और रात्रि में बली माना जाता है। इसके जो स्थान है वह जल अथवा गीली भूमि आदि है।

चन्द्रमा के दान, संध्या समय में करना चाहिए। चन्द्रमा से बुद्धिमता, धन, प्रसन्नता एवं उन्नति का विचार होता है इसकी विद्या ज्योतिष विद्या है ये शरीर में रक्त का कारक है और इसके देवता वरुण देवता कह गए हैं। यह कर्क राशि का स्वामी है

चंद्रमा से होने वाले रोग: –

चन्द्रमा के अशुभ प्रभाव से रक्त विकार, रक्तस्राव, रक्तचाप जलोदर रोग, अनिद्रा आदि रोग होते है

इसका एक राशि में संचार सवा दो दिन तक रहता है।

चंद्रमा का स्वभाव:-  यदि चंद्रमा शुभ स्थिति में हो तो ये सात्विक, विनम्र, मधुर भाषी बुद्धिमान शांत समर्थ वान, कोमलता, कल्पना प्रिय, अनुभूतियां और भावनाओं को क्रियात्मक एवं रचनात्मक रूप देना, नेतृत्व प्रिय, भ्रमणशील, राजभक्त एवं स्वस्थ होता है।

लेकिन जब यह अशुभ स्थिति में होता है तो तामसिक, चंचल, क्रूर, विश्वास घाती, स्वार्थी लालची, आलसी, रोगी स्त्री से शासित एवं सामाजिक नहीं होता

चन्द्रमा की रूचि

चन्द्रमा की रूचि चित्रकारी, काव्यशास्त्र, फोटोग्राफी, रत्न विज्ञान, नाटयशास्त्र एवं संगीत में रुचि रहती है इसलिए चंद्रमा से प्रभावित लोग कलाकार, ज्योतिषी, चित्रकार कवि फोटोग्राफर रत्न विशेषज्ञ नाटककार, संगीत, अभिनेता आदि का प्रतिनिधित्व करते हैं

चंद्र का विशेष प्रभाव

चंद्र सर्वाधिक बाली होने पर व्यक्ति के जीवन पर 24 से 25वें वर्ष में विशेष शुभ फल प्रदर्शित करता है यदि इस अवधि में दशा एवं अन्य ग्रह स्थिति भी अनुकूल हो तो सर्वाधिक उन्नती होती है। चंद्र शुभ स्थिति में होता है तो लोग स्वस्त रहते है किंतु चंद्र जब-जब गोचर में निर्बल होता है तो शरीर में रक्त विकार, रक्त स्राव रक्तचाप, जलोदर, उन्माद, पागलपन मानसिक स्थिरता एवं मति भ्रम, धातु रोग, ज्वर एवं कफ  विकार आदि होने लगते हैं।

इसलिए भावुक ना बने, अधिक सोच विचार ना करें सदैव प्रसन्न रहे संतुलित आहार एवं उचित व्यायाम करें एवं स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। मन की एकाग्रता के लिए योगासन करें विशेषकर त्राटक और ध्यान लगाए। विटामिन सी – बी तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें जिससे कि चंद्रमा के होने वाले दुष्प्रभाव को काम किया जा सके।

ज्योतिषीय सलाह के लिये संपर्क कर सकते है।

Pt. Umesh Sharma (Jyotish Acharya)

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